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Showing posts from November, 2014

प्राचीन गौरव - तक्षशिला विश्वविद्यालय

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साभार : गूगल इमेज  हिमालय की सुरम्यवादियों में सिन्धु एंव झेलम नदियों के दोआब में  प्राचीन गांधार जनपद की राजधानी तक्षशिला स्थित था | पाकिस्तान पुरातत्व विभाग के अनुसार यह स्थल एशिया के बारह प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में से एक है , जहाँ देश -विदेश के पर्यटक ,शिक्षार्थी और विद्वान अक्सर  आया करते है |इसकी खोज भारतीय पुरातत्व विभाग के तात्कालिन  निर्देशक सर जान मार्शल ने 1920 ई . में की थी | यह ऐतिहासिक नगरी बौद्धकाल में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए काफी प्रसिध्द थी | यहाँ 36 प्रकार की शिल्प  उधोग से सम्बन्धित व्यापारिक गतिविधियाँ प्रचलित थी | यहाँ के तक्षकार अपनी कला के लिए काफी  विख्यात थे | डॉ . डी. डी. कोशाम्बी के अनुसार तक्षकारों  की विथियाँ होने के कारण ही इस  नगर का नाम तक्षशिला पड़ा  था | पौराणिक कथाओ पर विश्वास किया जाय तो , अयोध्या के राजा राम के भाई भरत के पुत्र दक्ष को गांधार प्रदेश का राजा बनाया गया था , जिसने अपनी राजधानी के रूप में इस नगर  का निर्माण करवाया था | फलतः इस शहर का नाम उसके नाम पर रखा गया | जबकि श्रीलंकाई साहित्य के अनुसार यह प्रेदश  500 ई. पूर्व से ही

मुग़ल स्थापत्य

फर्ग्युसन  के अनुसार स्वाभाविकता ,मोहकता,तथा भव्यता मुग़ल स्थापत्य की प्रमुख विशेषता है.स्मिथ ने मुग़ल स्थापत्य शैली इंडो -पर्शियन का मिला - जुला रूप है .अबुल फज़ल बताता है कि बादशाह अकबर सुन्दर भवनों की योजना बनता है ,और अपने मस्तिष्क एवं ह्रदय के विचारों को पत्तर एवं गारे का रूप प्रदान करता है .अकबर ने अधिकतर लाल पत्थरों का प्रयोग किया है .सर्वप्रथम हुमायूँ के मकबरे में चारो ओर चाहरदीवारी  निर्मित की गयी तथा इसके बाहरपेड़ -पौधे लगाने की योजना का भी प्रचलन  हुआ तथा मकबरे के अन्दर प्रकाश हेतु रौशनदान की भी व्यवस्था की गयी .                          पर्सीब्राउन के अनुसार  ताजमहल को यदि हम एक वफ़ादार आशिक़ का खिराजकहते है तो हुमायूँ के मकबरे को हमें एक वफ़ादार बीबी की मह्नाबूबाना  पेशकस  कहना पड़ेगा .जमा मस्जिद मक्का के मस्जिद के आधार पर निर्मित किया गया था .मस्जिद के सेहन में शेख सलीम चिश्ती एवं इस्लाम खां का मकबरा है .दक्षिण द्वार के स्थान पर 176 फीट उच्चे बुलंद दरवाजे का निर्माण  किया गया है .जोधाबाई का महल अकबर द्वारा सीकरी में निर्मित सभी भवनों में सबसे बड़ा है .                        अक

WHTE SPACE - A NEW HOPE

शायद आने वाले निकट भविष्य में इंटरनेट उपभोक्ताओं को मुफ्त में इन्टरनेट सेवा उपलब्ध हो ! जी हाँ, दुनिया की अग्रणी सॉफ्टवेयर कंपनी ‘माइक्रोसॉफ्ट’ भारत के सुदूर गांवों में मुफ्त इंटरनेट सुविधा प्रदान करने की योजना बना रही है.  इसके लिए ‘ व्हाइट स्पेस'  टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जायेगा. माइक्रोसॉफ्ट ने भारत के ग्रामीण व दूरदराज के इलाकों में फ्री इंटरनेट मुहैया कराने के लिए सरकार के समक्ष ‘व्हाइट स्पेस स्पेक्ट्रम बैंड’ का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा है. कंपनी के अनुसार 'व्हाइट स्पेस' में उपलब्ध 200-300 मेगाहट्र्ज का स्पेक्ट्रम बैंड 10 किलोमीटर की परिधि में आसानी से सुचना का प्रसारण कर सकता है. समाचारों के अनुसार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर दो जिलों में इसका शुरूयात किया गया हैं. 'व्हाइट स्पेस' तकनीक क्या हैं ? दरअसल यह कोई नया तकनीक नहीं हैं बल्कि, टीवी चैनलो को जो स्पेक्ट्रम / फ्रिक्वेंसी आवंटित किया जाता हैं, उसका अनुपयोगी स्पेक्ट्रम / फ्रिक्वेंसी हैं. इन्ही अनुपयोगी फ्रिक्वेंसी का उपयोग करके ग्रामीण/दूर-दराज के क्षेत्रो में वायरलेस इंटरनेट की सुविधा पहुचाया जा सकत

भारत का गौरव - नालन्दा विश्वविद्यालय

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सौजन्य गूगल इमेज सुभाषित रत्नसंदेह शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहता है कि ‘ज्ञानं तृतीयं मनुजस्य नेत्रं समस्ततत्वार्थ विलोक दक्षम.’ अर्थात् ज्ञान मनुष्य का तीसरा नेत्र है , जो उसे समस्त तत्वों के मूल को जानने में सहायता करता है .प्राचीन काल में भारतवासियों का पूर्ण विश्वास था कि शिक्षा द्वारा विकसित बुद्धि ही आदमी की वास्तविक शक्ति होती है .अतः इस शक्ति की प्राप्ति के लिए उन्होंने जगह-जगह शिक्षा के केंद्र खोले ,मंदिरों ,मठों ,और विहारों को शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया .उनमे से एक नालंदा महाविहार अत्यधिक प्रसिद्द हुआ . बिहार की राजधानी पटना से दक्षिण में 40मील की दूरी पर  आधुनिक बड़गांव नामक गाँव में नालंदा महाविहार के अवशेष प्राप्त हुए है .यह स्थल प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी राजगृह से सिर्फ 8 किमी . की दूरी पर अवस्थित था .चीनी यात्री ह्वेनसांग के अनुसार गुप्तवंशीय शासक कुमारगुप्त ने बौधधर्मके त्रिरत्नों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए यहाँ पर एक बौद्धविहार की स्थापना कराई थी .कुमारगुप्त का शासन काल 415-455ई. बाते जाता है .संभव है कि कुमारगुप्त ने इसे

Act Of South East Policy

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                              एक्ट एट दक्षिण- पूर्व एशिया पॉलिसी के निहितार्थ आभार: गूगल इमेज  : http://gyanpradayani.com/act-at-south-east-policy प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  25वें एशियन सम्मेलन ने पी टो ((म्यानमार) में अपने अभिभाषण के क्रम में दक्षिण- पूर्व देशों के साथ भारत के सम्बन्धों को रेखांकित करते हुए कहा कि इन  देशों के साथ हमारे सिर्फ राजनीतिक ही नहीं वरन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सम्बन्ध भी सदियों से रहे हैं. प्रधानमंत्री का आर्थिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्तर  इन देशों को पर जोड़ने की कवायद भारत की विदेश नीति में  विचलन को दर्शाता है . 1990 के उतरार्द्ध से सफलतापूर्वक संचालित 'लुक एट ईस्ट' पालिसी अब पुरानी पड़ चुकी है ,अब कुछ करने का समय है .यहीं कारण है कि नई दिल्ली पूर्वी एशियाई देशों के साथ अब 'एक्ट एट ईस्ट' पालिसी अजमाना चाहता है . इसका एकमात्र मंतव्य पूर्वी देशों के भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित कर प्रधानमंत्री अपनी महत्वाकांक्षी योजना ' कम इन इंडिया एंड मेक इन इंडिया को गति प्रदान करना चाहते है .                    

What Is History

History is story of deeds and achievements of men living in societies - Henery Pirenne . History is philosophy teaching by examples - Sheik Ali . History is the knowledge of the past in the present and self knowledge of the Historians own mind as the present revival and reliving of the past experiences -Collingwood . All History is contemporary History -Croce . There is practical past from which the present has grown ,which has been influential in deciding the future of man - Oakcshott (Experience and its mode ) History is what the Historian writes .-G.R.Elton (The practise of History) History is continuous process of interaction between historian and his facts ,an unending dialogue  between past and present .-E.H.Carr (What is History) . Divine providence would take care of meaning of history if he (historian) take care of facts .-Ranke Piety to the past is not for its own sake, nor for the sake of the past but for the sake of the present to secure and enriched that it will